राज्य के अपर परिवहन आयुक्त (प्रवर्तन) संजय सिंह का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद, परिवहन विभाग ऐसे वाहनों पर कार्रवाई करने पर विचार कर रहा है। विभाग को लिखित आदेश मिलते ही प्रदेशव्यापी अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। वाहनों पर किसी भी प्रकार के शब्द लिखना प्रतिबंधित है। सभी वाहन मालिकों को इसका पालन करना होगा। ऐसा न करने पर जुर्माना और सजा का प्रावधान है।
उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद फिर से कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। परिवहन विभाग इस बात पर भी विचार कर रहा है कि उन बस संचालकों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाए जो अपनी फर्म का पंजीकरण जाति के आधार पर कराते हैं, क्योंकि वे बसों पर फर्म के जातिसूचक शब्द लिखते हैं। नए आदेश के तहत ऐसे वाहनों पर भी कार्रवाई की रणनीति बनाई जा रही है।
परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यूपी सरकार इस आदेश को लागू करने के लिए तैयार है। ऐसे वाहनों का धारा 192 और धारा 179 के तहत चालान किया जाएगा। पहली बार जुर्माना 500 रुपये से 5,000 रुपये तक होगा। दूसरी बार जुर्माना 10,000 रुपये और एक साल तक की जेल हो सकती है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि जातिगत भेदभाव को खत्म करने के लिए वाहनों पर जातिसूचक शब्द नहीं लिखे जाने चाहिए। ऐसे किसी भी वाहन पर जातिसूचक शब्द लिखे होने पर कार्रवाई की जाए। हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने भी निर्देश जारी कर दिए हैं। हालाँकि, परिवहन विभाग को अभी तक कोई लिखित आदेश नहीं मिला है।
तत्कालीन अपर परिवहन आयुक्त मुकेश चंद्रा ने 2020 में एक आदेश जारी कर नंबर प्लेट या विंडशील्ड पर जातिसूचक शब्द लिखे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया था। इसके बाद परिवहन विभाग, पुलिस और यातायात पुलिस ने अभियान चलाकर कार्रवाई की थी। यह अभियान कुछ दिनों तक चला, लेकिन पिछले तीन सालों से जातिसूचक शब्द लिखे किसी भी वाहन का चालान नहीं काटा गया है।

